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#📖 कविता और कोट्स✒️ #📒 मेरी डायरी #📜मेरी कलम से✒️ #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
📖 कविता और कोट्स✒️ - आईना वही है और सूरत बदल गई, जवानी जाने कब से ढल गई... ! चुपके बढ रही है या घट रही है ये भी मालूम नहीं , ये उम्र की साजिशें मुझे भी छल गई.. जो कल था वो आज नहीं , जो आज है वो कल नहीं, इस कल और आज के चक्रव्यूह में, ये जिंदगी ही फिसल गई.. आईना वही है और सूरत बदल गई, जवानी जाने कब से निकल गई...!!? चुपके आईना वही है और सूरत बदल गई, जवानी जाने कब से ढल गई... ! चुपके बढ रही है या घट रही है ये भी मालूम नहीं , ये उम्र की साजिशें मुझे भी छल गई.. जो कल था वो आज नहीं , जो आज है वो कल नहीं, इस कल और आज के चक्रव्यूह में, ये जिंदगी ही फिसल गई.. आईना वही है और सूरत बदल गई, जवानी जाने कब से निकल गई...!!? चुपके - ShareChat