आज धूप कुछ ज़्यादा ही सख़्त थी,
पर दिल पर उसका असर कम पड़ा।
क्योंकि भीतर तेरी याद की एक ठंडी लहर चलती रही।
प्यास भी थी, थकान भी,
फिर भी एक अजीब-सी ताज़गी साथ रही।
शायद यही तेरी मेहर है—
जहाँ हालात नहीं बदलते,
पर उन्हें महसूस करने का दिल बदल जाता है।
Mahadev har 🌺🙏
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