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#GodNightTuesday #रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान . अजपा जाप सोई गुरु पूरा कहावे जो, दो अक्षर का भेद बतावे। एक छुड़ावे एक लखावे, तो प्राणी निज घर को जावे। इसका वास्तविक अर्थ सतगुरु रामपाल जी ने बताया है यहां दो अक्षर का मतलब दो नाम से है एक ॐ और दूसरा तत् अथार्त जो सांकेतिक है क्युं कि संत साधु भाषा सांकेतिक होती है इसलिऐ नाम को अक्षर कहा है। प्रमाण के लिऐ वाणी श्री नानक जी ने कहा कि जै तु पढ़या पंडित बिन दुई अक्खर दुई नांवा। प्रणवत नानक इक लंघावे जै कर सच्च समावां।। उपरोक्त नानक जी कि वाणी मे भी इन्ही दो अक्षरों (ॐ तत्) का जिक्र है और नानक जी कि वाणी से ये भी सिद्ध हो जाता है कि ये दो अक्षर ही दो नाम है।आगे सतगुरु रामपाल जी कहते है कि इन दो अक्षरो मे से प्रथम अक्षर यानी ॐ काल का ऋण उतारके हमे मुक्त करता है और दूसरा अक्षर तत् हमे 12वें द्वार सतलोक को लखा देता है। दो अक्षर = दो नाम = ॐ तत् = अजपा जाप है, इसे सिद्ध करने के लिऐ अन्य वाणीयों से प्रमाण:- गरीब, राम नाम जप कर थिर होई। ॐ सोहं मंत्र दोई। गरीब, ॐ सोहं सार वस्तु है। जाप अजपा सही जान्या।। कबीर, अजपा जाप जपे दो अक्षर। काल भरम सब डहूं रे।। दो अक्षर = दो नाम = ॐ तत् = अजपा जाप। कहें कबीर अक्खर दुई भाख। होगा खसम तो लेगा राख।। गरीब,अजर अमर निज मूरत सूरत, ॐ सोहं दम ध्यावै।। श्वांसा सार रचे मोरे साहेब,जहां न माया मोहं। कहें कबीर सुनो भई साधो,जपो ॐ सोहं।। इसी नाम को सतगुरु नानक जी ने नामों मे नाम कहा:- नानक, साध संगती मिलिया मन माना। नां मे ना ॐ सोहं जाना।। वाणी संत घीसा जी:- घीसा,ॐ सोहं जप ले भाई। राम नाम कि या ही कमाई।। गरीब, सोहं मे थे ध्रुव प्रहलादा। ॐ सोहं वाद विवादा।। गरीब,सोहं उपर और है सतसुकृत इक नाम। सब हंसो का वंश है नही बस्ती नही गाम।। AnnapurnaMuhim SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
sant ram pal ji maharaj - अजपा जाप हा सहज धुना , परखि गुरूगम डारिये।।  निरखि , कर्म ममन मय मारिये।। मन पवन णिरकर शद्द सारनाम का स्मरण बिना रसना (जीभ) के मन तथा पवन यानि श्वांस के द्वारा किया जाता है। इस शब्द को निरखे यह अजपा (बिना जीभ से) जाप होता है अर्थात शब्द की जाँच करे फिर मन को सत्य ज्ञान का मंथन करके मारो यानि विषय विकारों को हटाओ satlokashram org @Satlokashram @Satlokashram001 अजपा जाप हा सहज धुना , परखि गुरूगम डारिये।।  निरखि , कर्म ममन मय मारिये।। मन पवन णिरकर शद्द सारनाम का स्मरण बिना रसना (जीभ) के मन तथा पवन यानि श्वांस के द्वारा किया जाता है। इस शब्द को निरखे यह अजपा (बिना जीभ से) जाप होता है अर्थात शब्द की जाँच करे फिर मन को सत्य ज्ञान का मंथन करके मारो यानि विषय विकारों को हटाओ satlokashram org @Satlokashram @Satlokashram001 - ShareChat