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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - ०४ मई दिल वही रखते हैंजिज़्बातबदलजाते हैं सोचने वालोंके अंदाज़बदलजाते हैं वोजो देते थेहर बातपेहवालामेरा अब मेरे ज़िक्र पे बोबातबदलजाते हैं NRPON sandeep dlhuja ०४ मई दिल वही रखते हैंजिज़्बातबदलजाते हैं सोचने वालोंके अंदाज़बदलजाते हैं वोजो देते थेहर बातपेहवालामेरा अब मेरे ज़िक्र पे बोबातबदलजाते हैं NRPON sandeep dlhuja - ShareChat