यह गीत एक गहरी आध्यात्मिक भावना को व्यक्त करता हैजिसमें माँ को शांतिप्रेम और ईश्वर का रूप माना गया है। कवि बताता है कि जब मन शांत होता है तब माँ ईश्वर का अनुभव अपने आप होने लगता है कि इंसान बाहर की दुनिया में भगवान और सत्य को खोजता रहता है लेकिन असली सत्य उसके अपने अंदर आत्मा में ही मौजूद होता है। बाहर की दुनिया केवल भ्रम माया है, जबकि सच्चा सुख और शांति आत्मज्ञान से मिलती है जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है मोह और भ्रम को छोड़ देता है तब उसे ईश्वर का साक्षात अनुभव होता है और जीवन में सच्ची शांति और आनंद प्राप्त होता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे, #Shanti Sukh Ke Vishram Men Mere Pas Rahti Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

