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#✝यीशु वचन
✝यीशु वचन - २३ मई "क्योंकि वन के सब पशु मेरे हैं, और हजारों पहाड़ों के पशु भी। " भजन संहिता ५०:१० कभी॰कभी हम ऐसा सोचते हैं कि हमारे चढ़ावे, दान, और सेवाएँ परमेश्वर पर कोई एहसान करती हैँ॰ मानो हम उन्हें ऐसी कोई वस्तु दे रहे हों जिसकी उन्हें कमी हो। परन्तु यह पद हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर पहले से ही सब कुछ के स्वामी हैं। स्वर्ग और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता को मनुष्य की उदारता पर कभी निर्भर नहीं रहना पड़ता। हमारे पास जो भी आशीषें हैं  हमारी संपत्ति, योग्यताएँ अवसर बुद्धि, और सामर्थ्य ~ सब पहले उसी के हाथ से प्राप्त हुई हैं। पवित्रशास्त्र पूछता है, "तेरे पास ऐसा क्या है जो तुझे मिला न हो?" परमेश्वर के बिना हमारे पास कुछ भी नहीं होता। यहाँ तक कि काम करने , सृजन करने , और सफलता पाने की हमारी सामर्थ्य भी उसकी अनुग्रह से बनी रहती है। इसलिए हमारे बलिदान ऐसे भुगतान नहीं हैं जिनके बाद हम उससे स्वतंत्र होकर जीवन जी सकें। परमेश्वर केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि धन्यवादी और आज्ञाकारी हृदय चाहता है। इसलिए आओ, हम नम्रता और कृतज्ञता के साथ जीवन बिताएँ, और परमेश्वर को केवल अपनी संपत्तियाँ ही नहीं, बल्कि अपने हृदय भी आनंदपूर्ण समर्पण और धन्यवाद के साथ अर्पित करें । सिर्फ एक आवाज - HINDI २३ मई "क्योंकि वन के सब पशु मेरे हैं, और हजारों पहाड़ों के पशु भी। " भजन संहिता ५०:१० कभी॰कभी हम ऐसा सोचते हैं कि हमारे चढ़ावे, दान, और सेवाएँ परमेश्वर पर कोई एहसान करती हैँ॰ मानो हम उन्हें ऐसी कोई वस्तु दे रहे हों जिसकी उन्हें कमी हो। परन्तु यह पद हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर पहले से ही सब कुछ के स्वामी हैं। स्वर्ग और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता को मनुष्य की उदारता पर कभी निर्भर नहीं रहना पड़ता। हमारे पास जो भी आशीषें हैं  हमारी संपत्ति, योग्यताएँ अवसर बुद्धि, और सामर्थ्य ~ सब पहले उसी के हाथ से प्राप्त हुई हैं। पवित्रशास्त्र पूछता है, "तेरे पास ऐसा क्या है जो तुझे मिला न हो?" परमेश्वर के बिना हमारे पास कुछ भी नहीं होता। यहाँ तक कि काम करने , सृजन करने , और सफलता पाने की हमारी सामर्थ्य भी उसकी अनुग्रह से बनी रहती है। इसलिए हमारे बलिदान ऐसे भुगतान नहीं हैं जिनके बाद हम उससे स्वतंत्र होकर जीवन जी सकें। परमेश्वर केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि धन्यवादी और आज्ञाकारी हृदय चाहता है। इसलिए आओ, हम नम्रता और कृतज्ञता के साथ जीवन बिताएँ, और परमेश्वर को केवल अपनी संपत्तियाँ ही नहीं, बल्कि अपने हृदय भी आनंदपूर्ण समर्पण और धन्यवाद के साथ अर्पित करें । सिर्फ एक आवाज - HINDI - ShareChat