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#☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #कविता #✍️ साहित्य एवं शायरी #👌 आत्मविश्वास
☝ मेरे विचार - अंतर्मन की खोज कौन हूँ मैं? कभी कोलाहल सा शोर हूँ मैं कभी गहरा अनंत मौन हूँ मैं। परतों में उलझा एक प्रश्न स्वयंको न जाने आखिर . कौन हूँ मैं? कभी ओठों की मंद मुस्कान हूँ मैं कभी भीतर छिपी व्याकुलता का नाम हूँ मैं। प्रतिदिन स्वयं को दर्पण में टटोलता एक अनसुलझा अनुमान हूँ मैं। कभी लक्ष्य की ओर बढ़ती राह हूँ मैं कभी अंबर छूने की अभिलाषा हूँ मैं। जीवन के इस दुर्गम सफर में अपनी ही तलाश में खड़ा . कौन हूँ मैं? पर अब धीरे धीरे यह बोध हो रहा है कि बाहर नहीं भीतर ही सब सिद्ध हो रहा है। मैं न शोर हूँ न मौन की सीमा मैं तो बस खुद को की एक अनंत महिमा हूँ जानने खोज रहा था जिसे दर ब दर भटक कर वो चेतना वो शक्ति वो पूर्णता हूँ मैं। अब समझ आया इस जीवन का सार कि खुद ही अपना कृष्ण और खुद ही अर्जुन हूँ मैं। अंतर्मन की खोज कौन हूँ मैं? कभी कोलाहल सा शोर हूँ मैं कभी गहरा अनंत मौन हूँ मैं। परतों में उलझा एक प्रश्न स्वयंको न जाने आखिर . कौन हूँ मैं? कभी ओठों की मंद मुस्कान हूँ मैं कभी भीतर छिपी व्याकुलता का नाम हूँ मैं। प्रतिदिन स्वयं को दर्पण में टटोलता एक अनसुलझा अनुमान हूँ मैं। कभी लक्ष्य की ओर बढ़ती राह हूँ मैं कभी अंबर छूने की अभिलाषा हूँ मैं। जीवन के इस दुर्गम सफर में अपनी ही तलाश में खड़ा . कौन हूँ मैं? पर अब धीरे धीरे यह बोध हो रहा है कि बाहर नहीं भीतर ही सब सिद्ध हो रहा है। मैं न शोर हूँ न मौन की सीमा मैं तो बस खुद को की एक अनंत महिमा हूँ जानने खोज रहा था जिसे दर ब दर भटक कर वो चेतना वो शक्ति वो पूर्णता हूँ मैं। अब समझ आया इस जीवन का सार कि खुद ही अपना कृष्ण और खुद ही अर्जुन हूँ मैं। - ShareChat