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#✍प्रेमचंद की कहानियां #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍प्रेमचंद की कहानियां - मैं तब भी जैंतबुझी सुस्कुनाचाहैए था।  ٤ मैं तब भी संभला हूं जब मुझे खो जाना चाहिए था। मैं रातों में रोया हूं॰ जब मुझे सो जाना चाहिए था। मैंने तब भी साथ दिया सबका, जब मुझे थोड़ा स्वार्थी हो चाहिए था।। जाना मैं तब भी जैंतबुझी सुस्कुनाचाहैए था।  ٤ मैं तब भी संभला हूं जब मुझे खो जाना चाहिए था। मैं रातों में रोया हूं॰ जब मुझे सो जाना चाहिए था। मैंने तब भी साथ दिया सबका, जब मुझे थोड़ा स्वार्थी हो चाहिए था।। जाना - ShareChat