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#जीवन की सीख
जीवन की सीख - ना कोई रिश्ता था नाम का, ना कोई रस्मों रिवाज़ का सहारा, फिर भी तुम्हें ऐसे चाहा है मैंने जैसे डूबता इंसान चाहता हो किनारा। तुम मेरी किस्मत में नहीं थे शायद, फिर भी हर दुआ में तुम्हारा ही नाम रहा, मैंने मोहब्बत उतनी శౌా की है, जितनी मरने वाला आख़िरी साँसों में जीना चाहता है। Ur 068" ना कोई रिश्ता था नाम का, ना कोई रस्मों रिवाज़ का सहारा, फिर भी तुम्हें ऐसे चाहा है मैंने जैसे डूबता इंसान चाहता हो किनारा। तुम मेरी किस्मत में नहीं थे शायद, फिर भी हर दुआ में तुम्हारा ही नाम रहा, मैंने मोहब्बत उतनी శౌా की है, जितनी मरने वाला आख़िरी साँसों में जीना चाहता है। Ur 068" - ShareChat