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#🌷शुभ गुरुवार #🙏सुविचार📿
🌷शुभ गुरुवार - बक्व्त का इशारा समझिए। नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पथ्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती , न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैंl जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दै, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव মান্কিন্ন बदल चुका है। तब खुद को की कोशिश मत कीजए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं , बोझ बन जाता है। बक्व्त का इशारा समझिए। नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पथ्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती , न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैंl जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दै, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव মান্কিন্ন बदल चुका है। तब खुद को की कोशिश मत कीजए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं , बोझ बन जाता है। - ShareChat