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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #❤️जीवन की सीख #😇 चाणक्य नीति #📖जीवन का लक्ष्य🤔
✍मेरे पसंदीदा लेखक - की रीत यही है ತಗಿಾ धन की खेती सब रिश्ते बने हजार। # सूखा पड़ा जब खेत 33 T747 477 // भावार्थः-जब आपके पास धन-दौलत होती है तो हर कोई आपसे जुड़ना चाहता है और आपके 'रिश्तेदार बनने की होड़़ लग जाती है। लेकिन , जैसे ही आपका बुरा समय आता है वही लोग आपको छोड़कर ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे वे आपको कभी जानते ही नहीं थे। जब तक आपकी हांडी पक रही है, हर कोई अपना चम्मच लेकर खड़ा है। हांडी ठंडी हुई नहीं कि लोग रास्ता ऐसे बदल लेेंगे जैसे कभी आपको जानते ही न थे। भैया, दुनिया की रीत यही है - 'बाप बड़ा न सबसे बड़ा रुपैया।' फसल कटी तो मेला, और सूखा पड़ा तो अकेला। की रीत यही है ತಗಿಾ धन की खेती सब रिश्ते बने हजार। # सूखा पड़ा जब खेत 33 T747 477 // भावार्थः-जब आपके पास धन-दौलत होती है तो हर कोई आपसे जुड़ना चाहता है और आपके 'रिश्तेदार बनने की होड़़ लग जाती है। लेकिन , जैसे ही आपका बुरा समय आता है वही लोग आपको छोड़कर ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे वे आपको कभी जानते ही नहीं थे। जब तक आपकी हांडी पक रही है, हर कोई अपना चम्मच लेकर खड़ा है। हांडी ठंडी हुई नहीं कि लोग रास्ता ऐसे बदल लेेंगे जैसे कभी आपको जानते ही न थे। भैया, दुनिया की रीत यही है - 'बाप बड़ा न सबसे बड़ा रुपैया।' फसल कटी तो मेला, और सूखा पड़ा तो अकेला। - ShareChat