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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - हमारे सर पर छत नहीं, और वे मंदिर बना रहे हैं। हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं, लेकिन इन्हें धर्म खतरे में नज़र आ रहा है। हमारे गाँव में अच्छे स्कूल नहीं, और इनके बच्चे विदेशों में पढ रहे हैं। हमारे हिस्से बेरोज़गारी आई, और ये हमें जाति-्धर्म में लड़वा रहे हैं। हमारे घरों में साफ पानी नहीं, लेकिन ये हमें आस्था के नाम पर मूत्र पीना सिखा रहे हैं। तन पर पूरे कपड़े नहीं, हमारे और ये हज़ारों के कपड़े पहन कर इतराते 81 हम टैक्स भरते हैं हर ` 7ب, और ये हमें जातियों में बाँटते हैं। अपने ही देश के लोगों को लड़ाकर, विश्वगुरु  फिर कहते हैं - " भारत बन रहा ೯l हमारे सर पर छत नहीं, और वे मंदिर बना रहे हैं। हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं, लेकिन इन्हें धर्म खतरे में नज़र आ रहा है। हमारे गाँव में अच्छे स्कूल नहीं, और इनके बच्चे विदेशों में पढ रहे हैं। हमारे हिस्से बेरोज़गारी आई, और ये हमें जाति-्धर्म में लड़वा रहे हैं। हमारे घरों में साफ पानी नहीं, लेकिन ये हमें आस्था के नाम पर मूत्र पीना सिखा रहे हैं। तन पर पूरे कपड़े नहीं, हमारे और ये हज़ारों के कपड़े पहन कर इतराते 81 हम टैक्स भरते हैं हर ` 7ب, और ये हमें जातियों में बाँटते हैं। अपने ही देश के लोगों को लड़ाकर, विश्वगुरु  फिर कहते हैं - " भारत बन रहा ೯l - ShareChat