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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - शायरी की डायरी कोईभी स्पर्श कितना भी लुभावना क्यौं न हो वो॰. तभी भाता है जब स्पर्श करने वाला मन को बेहद प्रिय हो.. शायरी की डायरी कोईभी स्पर्श कितना भी लुभावना क्यौं न हो वो॰. तभी भाता है जब स्पर्श करने वाला मन को बेहद प्रिय हो.. - ShareChat