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#☝रहीम की सीख🌟
☝रहीम की सीख🌟 - रहीम के प्रसिद्ध 5 दोहे रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो घटकायी टूटे से फिर न णुडे णुड़ गोठ परि जाय।। अर्थः प्रेम का रिश्ता धागे की तरह नाजूक हीता हे। इसे झटके से नहीं तोडना चाहिए क्योंकि एक बार टूट जाने पर वह फिर से नहीं जुड़ता और अगर जूड़ भी जाए नो उसमे गोँठ पड़् जाती हे (यानी रिश्ने ने खटास रह VA #)4 रहिमन देखि बहेन को॰ लघ न दीजिए डारि।  कहा करे तरवारि।।  सुरई जहा काम आवे अर्थःबड़े लोगों को देखकर छोटों को नुच्छ न समडों ओर उन्हे त्याग न टे। जिस जगह सुरई का काम हो॰ बहां तलवार ठ्या करेगी? अर्थात छोटे लोग 'H] +5 417 43 কা4 সন 31 जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।  चटन िष य्यापत नईीं लिपटे रहत नुर्जग।।  अर्थः अच्छे स्वभाव बाले व्यक्ति पर बुरी संगत्त का असर नहीं पडता। जेरो  चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ सॉप शी उसे विषैला नर्ही बना पाता।  क्षमा बडन को चाहिए, छोटन को उतपात।  कह रहीम हरि का पट्गो, जो भृगु मारी लात।  अर्थः बड़े लोगो को क्षमाशील होना चाहिए. छोटो का उत्पान ( शरारत) राहन নিঙ] करना नाहिए। जसे को लात मारी तवभी हरि ने भगवान नृग ऋषि  की महिमा कम नहीं हुई  ಗ 78 तरवर फ्त नहि खात 6 सरवट पियत न पान। करि रहीम परकाजं ठित, संपात संचह सुजान।।  अर्शः पेड़ खुद अपने फल नीं खाते, तालाब खुद अपना पानी नहीं पीते।  इसी तरह सज्जनर्व्यात्े के तित के लिए धन सचय करते ई॰ खुद ठे दूसरों  लिए नहीं। रहीम के प्रसिद्ध 5 दोहे रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो घटकायी टूटे से फिर न णुडे णुड़ गोठ परि जाय।। अर्थः प्रेम का रिश्ता धागे की तरह नाजूक हीता हे। इसे झटके से नहीं तोडना चाहिए क्योंकि एक बार टूट जाने पर वह फिर से नहीं जुड़ता और अगर जूड़ भी जाए नो उसमे गोँठ पड़् जाती हे (यानी रिश्ने ने खटास रह VA #)4 रहिमन देखि बहेन को॰ लघ न दीजिए डारि।  कहा करे तरवारि।।  सुरई जहा काम आवे अर्थःबड़े लोगों को देखकर छोटों को नुच्छ न समडों ओर उन्हे त्याग न टे। जिस जगह सुरई का काम हो॰ बहां तलवार ठ्या करेगी? अर्थात छोटे लोग 'H] +5 417 43 কা4 সন 31 जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।  चटन िष य्यापत नईीं लिपटे रहत नुर्जग।।  अर्थः अच्छे स्वभाव बाले व्यक्ति पर बुरी संगत्त का असर नहीं पडता। जेरो  चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ सॉप शी उसे विषैला नर्ही बना पाता।  क्षमा बडन को चाहिए, छोटन को उतपात।  कह रहीम हरि का पट्गो, जो भृगु मारी लात।  अर्थः बड़े लोगो को क्षमाशील होना चाहिए. छोटो का उत्पान ( शरारत) राहन নিঙ] करना नाहिए। जसे को लात मारी तवभी हरि ने भगवान नृग ऋषि  की महिमा कम नहीं हुई  ಗ 78 तरवर फ्त नहि खात 6 सरवट पियत न पान। करि रहीम परकाजं ठित, संपात संचह सुजान।।  अर्शः पेड़ खुद अपने फल नीं खाते, तालाब खुद अपना पानी नहीं पीते।  इसी तरह सज्जनर्व्यात्े के तित के लिए धन सचय करते ई॰ खुद ठे दूसरों  लिए नहीं। - ShareChat