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#☺ જીવનની વાસ્તવિક્તા
☺ જીવનની વાસ્તવિક્તા - जरूरत से ज्यादा बातचीतः जरूरत से ज्यादा लगाव M ज़रूरत से ज्यादा उम्मीद और ज़रूरत से ज्यादा भरोसा अक्सर इंसान को अंत में जरूरत से ज्यादा कष्ट देता है।' जरूरत से ज्यादा बातचीतः जरूरत से ज्यादा लगाव M ज़रूरत से ज्यादा उम्मीद और ज़रूरत से ज्यादा भरोसा अक्सर इंसान को अंत में जरूरत से ज्यादा कष्ट देता है।' - ShareChat