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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲अल्लाह हु अक़बर #🌙इस्लाम धर्म🕌 #👌 अच्छी सोच👍
❤️अस्सलामु अलैकुम - নিলাল हज़रत बिलाल हब्शी थे सय्यद शेख नहीं थे काले थे सफेद नहीं थे गुलाम थे आज़ाद नहीं थे अनपढ़ थे आलिम नहीं थे लेकिन उनके तक़वा का ये आलम मुकर्रामा की था के चलते थे मक्का सरजमीन पर क़दमो की आहट जन्नत में सुनाई देती थी। নিলাল हज़रत बिलाल हब्शी थे सय्यद शेख नहीं थे काले थे सफेद नहीं थे गुलाम थे आज़ाद नहीं थे अनपढ़ थे आलिम नहीं थे लेकिन उनके तक़वा का ये आलम मुकर्रामा की था के चलते थे मक्का सरजमीन पर क़दमो की आहट जन्नत में सुनाई देती थी। - ShareChat