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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - n [ న n = அ చ్ృళ  నన அ % 2^ aa a 43 9 చ్  >>% 9 राम >   याय ಟ 9 0 ^ ಟ 9 ನ $ = > 4 89 $ $ 3 82 89 9 = 883 89 BBBA 449 నా 5 88888_ 349999 ೨ನಕರನ್ ggg3 ನನನನ ಶನನನ್ 84489 555558889 FEEEBBBE 9888 6555 ಟ 555 ಟ ನ ೧೪ನೆ 0 ನನೆ ೯ <९ ٤٣ ನೆ ~9 ९ > प्रभु पहिचानि परेउ सो सुख उमा जाइ नहिं HII ~ 096 e { . 03ಎ/ पुलकित तन मुख आव न बचना। देखत रुचिर बेष कै रचना Il भावार्थ : प्रभु को पहचानकर हनुमान्जी उनके चरण पकड़कर पर गिर पड़े (उन्होंने साष्टांग दंडवत् प्रणाम किया) | ப (शिवजी कहते हैं- ) हे पार्वती! वह सुख वर्णन नहीं किया जा शरीर पुलकित है, मुख से वचन नहीं निकलता। 4 सकता सुंदर वेष की रचना देख रहे हैं! II३II प्रभु के n [ న n = அ చ్ృళ  నన அ % 2^ aa a 43 9 చ్  >>% 9 राम >   याय ಟ 9 0 ^ ಟ 9 ನ $ = > 4 89 $ $ 3 82 89 9 = 883 89 BBBA 449 నా 5 88888_ 349999 ೨ನಕರನ್ ggg3 ನನನನ ಶನನನ್ 84489 555558889 FEEEBBBE 9888 6555 ಟ 555 ಟ ನ ೧೪ನೆ 0 ನನೆ ೯ <९ ٤٣ ನೆ ~9 ९ > प्रभु पहिचानि परेउ सो सुख उमा जाइ नहिं HII ~ 096 e { . 03ಎ/ पुलकित तन मुख आव न बचना। देखत रुचिर बेष कै रचना Il भावार्थ : प्रभु को पहचानकर हनुमान्जी उनके चरण पकड़कर पर गिर पड़े (उन्होंने साष्टांग दंडवत् प्रणाम किया) | ப (शिवजी कहते हैं- ) हे पार्वती! वह सुख वर्णन नहीं किया जा शरीर पुलकित है, मुख से वचन नहीं निकलता। 4 सकता सुंदर वेष की रचना देख रहे हैं! II३II प्रभु के - ShareChat