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##🙏जय महाकाल📿
#🙏जय महाकाल📿 - ८५ "शिखर शून्य पर ध्यान मग्न थे, जो वैरागी अविनाशी, शक्ति के सान्निध्य में आए॰ बनकर प्रेम के अभिलाषी | त्रिशूल विराजे , दूजे कंधे गौरी का एक हाथ में HR, अन्द्भुत है यह रूप शिव का, प्रैम ही जिसका है 8/" ८५ "शिखर शून्य पर ध्यान मग्न थे, जो वैरागी अविनाशी, शक्ति के सान्निध्य में आए॰ बनकर प्रेम के अभिलाषी | त्रिशूल विराजे , दूजे कंधे गौरी का एक हाथ में HR, अन्द्भुत है यह रूप शिव का, प्रैम ही जिसका है 8/" - ShareChat