"आज ही के दिन मेरी जन्नत 11 जून 2002 दिन मंगलवार मेरी माँ का योमे विसाल...
जब मैं उन्हें सुपुर्द-ए-खाक करके आया, तो दिल को बहुत तकलीफ हुई कि मेरी जन्नत अब नहीं रही..
माँ तुम्हारी याद में ये शब्द लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूँ। 23 साल की परवरिश के बाद अलविदा कहना इतना मुश्किल होगा, कभी सोचा नहीं था। तुम्हारी मुस्कराहट, तुम्हारी बातें, तुम्हारा साथ सब कुछ हमेशा के लिए यादों में बदल गया। तुम जैसी अच्छी माँ को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अल्लाह पाक तुम्हें जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मुकाम अता फरमाए और आप की कब्र को नूर से भर दे और आपकी मगफिरत अता फरमाए...."
अमीन #❤️मेरी माँ मेरी दुनिया ❤️ #❤️ Love You Maa ❤️
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