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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - ऐसे ही गुज़ार ली जिंदगी मैंने.... !!! कभी खुदा कि रज़ा समझ कर.. कभी अपने गुनाहों कि सज़ा समझ कर.... !! ! ऐसे ही गुज़ार ली जिंदगी मैंने.... !!! कभी खुदा कि रज़ा समझ कर.. कभी अपने गुनाहों कि सज़ा समझ कर.... !! ! - ShareChat