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#✈Last travel memories😎
✈Last travel memories😎 - कभी कभी मन यूँ ही उदास हो जाता है, क्योंकि मैं खुद से, अपने ` किए हुए कामों से संतुष्ट नहीं हूं॰.. जो कर रहा हूं॰ उसमें दिल नहीं लगता। दो पल की मिलती है, लेकिन उसके बाद वही खालीपन, वही बेचैनी फिर से लौट खुशी ' आती है। हर दिन एक ही सवाल दिमाग में घूमता रहता है - मैं आखिर कर हूं अपनी ज़िंदगी में? जब भी सोचता हूं कि मैं क्या ; क्या रहा कर सकता था और आज क्या कर रहा हूं॰ बस यही सोच सोचकर दिल भारी हो जाता है। कोई कुछ कहता भी नहीं, फिर भी चेहरे की रौनक जैसे अपने आप ही कभी गायब हो जाती है. ना हंसने का मन करता है, ना किसी से बात करने का। जब खुद को आईने में देखता हूं॰ तो यही लगता है कि अगर वक्त रहते खुद को संभाल लिया होता, खुद पर थोड़ा काम किया होता, तो शायद आज ये हाल ना होता... और फिर वही सोच मुझे अंदर से तोड़ देती है। कभी॰कभी अपने ही पसंदीदा लोगों से बात करने का भी दिल नहीं करता.. है जैसे सब से दूर चला जाऊं, हर रास्ता बंद कर दूं| लगता है ऐसा लगता कोई समझेगा ही नहीं, सब बस जज करेंगे , सलाह देंगे , लेकिन मेरी असली फीलिंग कोई नहीं समझेगा... और यही सोचकर मैं खुद में ही सिमट जाता कभी गु़स्सा ` बिल्कुल ikes करने का मन करता है, कभी बिना वजह रोने का... बच्चों की तरह। दिल करता है कोई बिना जज किए बस समझ ले, लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं फिर से दिल ना टूट जाए... और बस यही सब सोचकर, मैं फिर से चुप हो जाता हूं॰. और अंदर ही अंदर उदास हो जाता हूं कभी कभी मन यूँ ही उदास हो जाता है, क्योंकि मैं खुद से, अपने ` किए हुए कामों से संतुष्ट नहीं हूं॰.. जो कर रहा हूं॰ उसमें दिल नहीं लगता। दो पल की मिलती है, लेकिन उसके बाद वही खालीपन, वही बेचैनी फिर से लौट खुशी ' आती है। हर दिन एक ही सवाल दिमाग में घूमता रहता है - मैं आखिर कर हूं अपनी ज़िंदगी में? जब भी सोचता हूं कि मैं क्या ; क्या रहा कर सकता था और आज क्या कर रहा हूं॰ बस यही सोच सोचकर दिल भारी हो जाता है। कोई कुछ कहता भी नहीं, फिर भी चेहरे की रौनक जैसे अपने आप ही कभी गायब हो जाती है. ना हंसने का मन करता है, ना किसी से बात करने का। जब खुद को आईने में देखता हूं॰ तो यही लगता है कि अगर वक्त रहते खुद को संभाल लिया होता, खुद पर थोड़ा काम किया होता, तो शायद आज ये हाल ना होता... और फिर वही सोच मुझे अंदर से तोड़ देती है। कभी॰कभी अपने ही पसंदीदा लोगों से बात करने का भी दिल नहीं करता.. है जैसे सब से दूर चला जाऊं, हर रास्ता बंद कर दूं| लगता है ऐसा लगता कोई समझेगा ही नहीं, सब बस जज करेंगे , सलाह देंगे , लेकिन मेरी असली फीलिंग कोई नहीं समझेगा... और यही सोचकर मैं खुद में ही सिमट जाता कभी गु़स्सा ` बिल्कुल ikes करने का मन करता है, कभी बिना वजह रोने का... बच्चों की तरह। दिल करता है कोई बिना जज किए बस समझ ले, लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं फिर से दिल ना टूट जाए... और बस यही सब सोचकर, मैं फिर से चुप हो जाता हूं॰. और अंदर ही अंदर उदास हो जाता हूं - ShareChat