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#santrampaljimaharaj - सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५ श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ (पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और सूक्ष्म जड (ऊपर ) शाखाऐं नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते वेद कबीर साहेब वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूव ) जान लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान (ননী কা মাং) নানন বালা तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारूप श्रीमद्नगवद गीता সমমোদরন गीता शरीमद्श्षावद  गीता - शाखा शाख 2 IIGI 3 ब्रह्मा जी विष्णु ; जी शिव जी (सूष्टि के कर्ता ) (पालनकर्ता ) (संहारकती ) वाणी और गीता का 3IGRTu कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार वृक्ष है, एक उल्टा लटका हुआ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) पात तीन शाखाएं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन, भौतिक जगत ) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints सृष्टि रचना जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५ श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्र्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ (पीपल ) वृक्ष की जड़ ऊपर ( परमात्मा में) है और सूक्ष्म जड (ऊपर ) शाखाऐं नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते वेद कबीर साहेब वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुरूव ) जान लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान (ননী কা মাং) নানন বালা तत्वदर्शी संत होता हैं। I श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारूप श्रीमद्नगवद गीता সমমোদরন गीता शरीमद्श्षावद  गीता - शाखा शाख 2 IIGI 3 ब्रह्मा जी विष्णु ; जी शिव जी (सूष्टि के कर्ता ) (पालनकर्ता ) (संहारकती ) वाणी और गीता का 3IGRTu कबीर साहेब की वाणी और श्रीमदभगवद गीता का यह श्लोक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार वृक्ष है, एक उल्टा लटका हुआ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरुष कबीर साहेब हैं, तना अक्षर पुरुष, (44) पात तीन शाखाएं त्रिदेव हैं और रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार हैं। जो इस रहस्य को जानता है, (समस्त जीव जंतु , प्रकृति वही सच्चा ज्ञानी. तत्वदर्शी संत मानव जीवन, भौतिक जगत ) और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints - ShareChat