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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - आज भी मुझे ज़रुरत है. तुम्हारी না সান কিননী নাং खुद को समझाया.. कि तुम्हें भूल जाऊँ. मगर ये दिल हर बार हार जाता है क्योंकि तुम सिर्फ़ एक इंसान नहीं थे.. तुम मेरी आदत थे. और कुछ आदतें . जिंदगी भर नहीं छूटतीं. आज भी मुझे ज़रुरत है. तुम्हारी না সান কিননী নাং खुद को समझाया.. कि तुम्हें भूल जाऊँ. मगर ये दिल हर बार हार जाता है क्योंकि तुम सिर्फ़ एक इंसान नहीं थे.. तुम मेरी आदत थे. और कुछ आदतें . जिंदगी भर नहीं छूटतीं. - ShareChat