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#✍सरकारी / प्राइवेट नौकरी #💼 नौकरी की तैयारी
✍सरकारी / प्राइवेट नौकरी - भारतीय साहित्य के युगप्रवर्तक कवि और लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' (२३ सितंबर, १९०८ 24 3<, 1974) पुण्यतिथि पर सादर नमन #క3IT इनका जन्म सिमरिया , ज़िला मुंगेर (अब बेगूसराय) , बिहार  থা| श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हे। आधुनिक  युग के इन्हें ' राष्ट्रकवि' की उपाधि से विभूषित किया गया है। इनकी कालजयी कृति ' उर्वशी' के लिए वर्ष १९७२ में ' ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'संस्कृति के चार अध्याय' के लिए वर्ष १९५९ में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।  भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण वर्ष १९५९) से अलंकृत किया। इनकी रचना  को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ काव्यों में ७४वौँ स्थान दिया गया हे। 'ক্তকঃীন' 31, प्रसिद्ध रचनाएँ रेणुका, हुंकार, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, मिट्टी की अर्धनारीश्वरः रेती के फूल  ` =47. भारतीय साहित्य के युगप्रवर्तक कवि और लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' (२३ सितंबर, १९०८ 24 3<, 1974) पुण्यतिथि पर सादर नमन #క3IT इनका जन्म सिमरिया , ज़िला मुंगेर (अब बेगूसराय) , बिहार  থা| श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हे। आधुनिक  युग के इन्हें ' राष्ट्रकवि' की उपाधि से विभूषित किया गया है। इनकी कालजयी कृति ' उर्वशी' के लिए वर्ष १९७२ में ' ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'संस्कृति के चार अध्याय' के लिए वर्ष १९५९ में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।  भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण वर्ष १९५९) से अलंकृत किया। इनकी रचना  को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ काव्यों में ७४वौँ स्थान दिया गया हे। 'ক্তকঃীন' 31, प्रसिद्ध रचनाएँ रेणुका, हुंकार, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, मिट्टी की अर्धनारीश्वरः रेती के फूल  ` =47. - ShareChat