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#राधा रानी #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻 श्री प्रेमानंद महाराज जी 🙏🏻
राधा रानी - प!किसी को झूठी আনাড় ৎিল उम्मीद मत दों! ! एक बार एक अमीर व्यक्ति एक मंदिर के बाहर गरीबों को दान दे रहा था। कि उसकी नजर एक भिखारी पर पडी। जिसके पैर में गहरा जख्म था। जख्म सड़ रहा था।  ने भिखारी से पूछा " ये जख " ये जख्म अमीर व्यक्ति कब से है? और तुम्हे दर्द नहीं होता क्या?  भिखारी काफी वर्ष हो गए। अब बोला पुराना जख्म है साहब तो आदत पड़ गई है।॰ अमीर बोला " मै कल आकर में तुम्हारा  तुझे ले जाऊंगा| और एक बढ़िया अस्पताल इलाज करवाऊंगा  ये सुनकर भिखारी बहुत खुश हुआ अमीर चला गया। और पांच दिन तक उसे भिखारी से किया वादा याद ही नहीं आया। मगर छठे दिन ज्यों ही उसे याद आया तो वह गाडी लेकर मंदिर के पास आया और उस भिखारी को ढूंढने लगा। तब दूसरे भिखारियों ने बताया कि वह जख्म वाला भिखारी तो कल मर Rg एक चिट्ठी दे गया है अमीर ने और आपके गया आपको मुझे उम्मीद नहीं देनी चाहिए লিভা থা 4 ज़ख्म ठीक होने की उम्मीद ने मेरी दर्द सहने की थी शक्ति को खत्म कर दिया। और जब आप अपने वादे पर नही पहुंचे तब तो दर्द जानलेवा हो गया था। जिस दर्द को मै बरसों से सह रहा था वही दर्द उम्मीद के कारण मुझसे दो दिन भी नहीं सहा गया। किसी को झूठी उम्मीद मत दीजिए क्योंकि उम्मीद जान ले लेती है। प!किसी को झूठी আনাড় ৎিল उम्मीद मत दों! ! एक बार एक अमीर व्यक्ति एक मंदिर के बाहर गरीबों को दान दे रहा था। कि उसकी नजर एक भिखारी पर पडी। जिसके पैर में गहरा जख्म था। जख्म सड़ रहा था।  ने भिखारी से पूछा " ये जख " ये जख्म अमीर व्यक्ति कब से है? और तुम्हे दर्द नहीं होता क्या?  भिखारी काफी वर्ष हो गए। अब बोला पुराना जख्म है साहब तो आदत पड़ गई है।॰ अमीर बोला " मै कल आकर में तुम्हारा  तुझे ले जाऊंगा| और एक बढ़िया अस्पताल इलाज करवाऊंगा  ये सुनकर भिखारी बहुत खुश हुआ अमीर चला गया। और पांच दिन तक उसे भिखारी से किया वादा याद ही नहीं आया। मगर छठे दिन ज्यों ही उसे याद आया तो वह गाडी लेकर मंदिर के पास आया और उस भिखारी को ढूंढने लगा। तब दूसरे भिखारियों ने बताया कि वह जख्म वाला भिखारी तो कल मर Rg एक चिट्ठी दे गया है अमीर ने और आपके गया आपको मुझे उम्मीद नहीं देनी चाहिए লিভা থা 4 ज़ख्म ठीक होने की उम्मीद ने मेरी दर्द सहने की थी शक्ति को खत्म कर दिया। और जब आप अपने वादे पर नही पहुंचे तब तो दर्द जानलेवा हो गया था। जिस दर्द को मै बरसों से सह रहा था वही दर्द उम्मीद के कारण मुझसे दो दिन भी नहीं सहा गया। किसी को झूठी उम्मीद मत दीजिए क्योंकि उम्मीद जान ले लेती है। - ShareChat