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#💓 दिल के अल्फ़ाज़
💓 दिल के अल्फ़ाज़ - ONIUNBHARUAU5686 uhammadAs Rarita na तुम मेरे दिनों में यूँ ही चले आते हो, जैसे धूप किसी बंद कमरे में रास्ता ढूँढ ले। और रात में तुम्हारी याद तकिये के नीचे रखी किसी चिट्ठी सी बिना पढ़े भी सुकून देती रहती है। मैं तुम्हें छूता नहीं , बस तुम्हारे होने में ठहर सा जाता हूँ भारद्वाज (मेरे शब्द) Reply ONIUNBHARUAU5686 uhammadAs Rarita na तुम मेरे दिनों में यूँ ही चले आते हो, जैसे धूप किसी बंद कमरे में रास्ता ढूँढ ले। और रात में तुम्हारी याद तकिये के नीचे रखी किसी चिट्ठी सी बिना पढ़े भी सुकून देती रहती है। मैं तुम्हें छूता नहीं , बस तुम्हारे होने में ठहर सा जाता हूँ भारद्वाज (मेरे शब्द) Reply - ShareChat