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#🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋सुन्नी इस्लामिक ग्रुप🕋 #🕌 मक्का मदीना 🤲
🕋जुम्मा मुबारक🤲 - हज़रत अबू सईद ख़ुद री (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि उन्होंने रसूलुल्लाह ६ को यह इरशाद फ़रमाते हुए सुनाः "जब (कोई) बंदा मुसलमान हो जाए और उसका इस्लाम उम्दा हो (यानी यक़ीन, इख़्लास और सलीक़े के साथ हो), तो अललाह तआला उसके हर उस गुनाह को माफ़ फ़रमा देता है जो उसने इस (इस्लाम लाने) से पहले किया था। और अब इसके बाद (के लिए  बदला शुरू हो जाता हैः (यानी) 3{#<) 4 एक नेकी के बदले दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक (सवाब) दिया जाता है, और एक ব্রুয়াৎ का के बराबर (सज़ा ) दिया जाता है, बदला उसी बुराई  भी मगर यह कि अल्लाह तआला उस बुराई से ' दरगुज़र फ़रमाए (यानी उसे भी माफ़ कर दे)।" (सहीह बुख़ारी , हदीसः ४१ / सुनन अन नसाईः ४९९८) हज़रत अबू सईद ख़ुद री (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि उन्होंने रसूलुल्लाह ६ को यह इरशाद फ़रमाते हुए सुनाः "जब (कोई) बंदा मुसलमान हो जाए और उसका इस्लाम उम्दा हो (यानी यक़ीन, इख़्लास और सलीक़े के साथ हो), तो अललाह तआला उसके हर उस गुनाह को माफ़ फ़रमा देता है जो उसने इस (इस्लाम लाने) से पहले किया था। और अब इसके बाद (के लिए  बदला शुरू हो जाता हैः (यानी) 3{#<) 4 एक नेकी के बदले दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक (सवाब) दिया जाता है, और एक ব্রুয়াৎ का के बराबर (सज़ा ) दिया जाता है, बदला उसी बुराई  भी मगर यह कि अल्लाह तआला उस बुराई से ' दरगुज़र फ़रमाए (यानी उसे भी माफ़ कर दे)।" (सहीह बुख़ारी , हदीसः ४१ / सुनन अन नसाईः ४९९८) - ShareChat