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#✍️ साहित्य एवं शायरी #❤️ प्यार की कहानियां #❤️ प्यार की कहानियां #💕दिल की💕बात 💕दिल से💕दिल तक💕अल्फाज ए मुहब्बत 💕( आर-दत्ता)😘😟 #dil ki baate______ #💌शब्द से शायरी✒️
✍️ साहित्य एवं शायरी - सादगी में भी   मुझे कितनी कहर लगती है। এনী எ उसे पक्का नज़र लगती है। झुमके मैं ये कहता भी॰ मगर, गुज़ारें शाम इक H मिलने से यहाँ सबको खबर लगती है। 84 & मैं उन्हें देखूँ तो पलकों को झुका लेतीं हैं इस शर्म में जिन्नत की सहर लगती है। मुझको उनसे कह दो कि कभी मिले साड़ी में, मुझसे जब वो चलती हैं तो दरिया की लहर लगती है। होता   हूँ तो रूठा   सा॰ रहे दिल मेरा, अब तोइक पल की भी जहर लगती है। जुदाई मैने चाहा था कि मैं चूम लूँ HI ತFen, ऐसा   करने से उन्हें   मेरी लगती है। उमर पास बैठो कि तसल्ली हो ज़रा इस दिल को, दरमियाँ दूरी   क्युँ लगती है। ज़्यादा ही इधर मैं यहाँ जलता हूँ उनकी यादों में पल पल ही| भी यकीनन ही उधर लगती है। चोट उनको भी॰  मुझे है इतनी, उनको छूने की तमन्ना जितनी पीहू को भी शबनम को छू कर लगती है। वो जो रुठ जाए तो फिर चैन कहाँ मिलता है॰ की दवा दर्द के मारों को किधर लगती है। सादगी में भी   मुझे कितनी कहर लगती है। এনী எ उसे पक्का नज़र लगती है। झुमके मैं ये कहता भी॰ मगर, गुज़ारें शाम इक H मिलने से यहाँ सबको खबर लगती है। 84 & मैं उन्हें देखूँ तो पलकों को झुका लेतीं हैं इस शर्म में जिन्नत की सहर लगती है। मुझको उनसे कह दो कि कभी मिले साड़ी में, मुझसे जब वो चलती हैं तो दरिया की लहर लगती है। होता   हूँ तो रूठा   सा॰ रहे दिल मेरा, अब तोइक पल की भी जहर लगती है। जुदाई मैने चाहा था कि मैं चूम लूँ HI ತFen, ऐसा   करने से उन्हें   मेरी लगती है। उमर पास बैठो कि तसल्ली हो ज़रा इस दिल को, दरमियाँ दूरी   क्युँ लगती है। ज़्यादा ही इधर मैं यहाँ जलता हूँ उनकी यादों में पल पल ही| भी यकीनन ही उधर लगती है। चोट उनको भी॰  मुझे है इतनी, उनको छूने की तमन्ना जितनी पीहू को भी शबनम को छू कर लगती है। वो जो रुठ जाए तो फिर चैन कहाँ मिलता है॰ की दवा दर्द के मारों को किधर लगती है। - ShareChat