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मेरी डायरी ✍️ - एक बूढ़ा व्यक्ति रोज़ मंदिर के बाहर लोगों को देखता था। वह हमेशा बैठकर मुस्कुराता रहता, चाहे मौसम कैसा भी हो। एक दिन एक युवक ने उससे पूछा, "बाबा, आपकी ज़िंदगी में कभी दुख नहीं आया क्या?" बूढ़ा हँस पड़ा और बोला, "बेटा , दुख तो हर इंसान की ज़िंदगी में आता है। लेकिन मैंने एक बात सीख ली है, अगर मैं हर दुख को पकड़कर बैठ जाऊँगा , तो खुशियों आने की जगह ही नहीं बचेगी।" फिर उसने हाथ में रेत उठाई और कहा, "इसे कसकर पकड़ोगे तो हाथ दर्द करेगा लेकिन য और रेत भी गिर हल्के जाएगी। पकड़ोगे तो यह ठहर जाएगी।" जीवन भी ऐसा ही है। हर बात को दिल से लगाकर मत बैठो। कुछ चीज़ों को समय पर छोड़ देना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है। एक बूढ़ा व्यक्ति रोज़ मंदिर के बाहर लोगों को देखता था। वह हमेशा बैठकर मुस्कुराता रहता, चाहे मौसम कैसा भी हो। एक दिन एक युवक ने उससे पूछा, "बाबा, आपकी ज़िंदगी में कभी दुख नहीं आया क्या?" बूढ़ा हँस पड़ा और बोला, "बेटा , दुख तो हर इंसान की ज़िंदगी में आता है। लेकिन मैंने एक बात सीख ली है, अगर मैं हर दुख को पकड़कर बैठ जाऊँगा , तो खुशियों आने की जगह ही नहीं बचेगी।" फिर उसने हाथ में रेत उठाई और कहा, "इसे कसकर पकड़ोगे तो हाथ दर्द करेगा लेकिन য और रेत भी गिर हल्के जाएगी। पकड़ोगे तो यह ठहर जाएगी।" जीवन भी ऐसा ही है। हर बात को दिल से लगाकर मत बैठो। कुछ चीज़ों को समय पर छोड़ देना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है। - ShareChat