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✒ शायरी - ये कौन हैजो फिल से उतरता ही नहीं, फ़ासले कबके बढ गए, मगर बिछड़ता ही नहीं। सोचा, कई बार अब उसे याद नहीं करूँगा , फिरख़याल आया= यादें कहाँ किसी कीइजाज़त से आती हैं। ये कौन हैजो फिल से उतरता ही नहीं, फ़ासले कबके बढ गए, मगर बिछड़ता ही नहीं। सोचा, कई बार अब उसे याद नहीं करूँगा , फिरख़याल आया= यादें कहाँ किसी कीइजाज़त से आती हैं। - ShareChat