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#शब्द संवाद #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
शब्द संवाद - रपदखरशए पी एस यादव ' अजनबी' देखता है मगरवो बोल नहीं पाए। कैसी मोहब्बत   चुपके से जुल्म ढाए। मिलते ही नजर झुक जाती निगाहें बयां करने से सनम कैसा शर्माए। की घटाएं होश उड़ाती अदाएं जुल्फों च बेखौफ अदा ख्वाब बनकर सताए। कोई साहिर महबूब है हमारा या बंद आंखों में भी वो रूप नजर आए। कदमों से तेरे राहों में आती बहार, छुपते  ही तेरे वो घना कोहरा छाए। এনব্সভ্ নু ; # गुलशन बहार चफ़ा की यह गुत्थी मुझको उलझाए। बेरहम  इश्क की होती ना कभी शाम जितना भुलाया तू उतना मुझे भाए। रपदखरशए पी एस यादव ' अजनबी' देखता है मगरवो बोल नहीं पाए। कैसी मोहब्बत   चुपके से जुल्म ढाए। मिलते ही नजर झुक जाती निगाहें बयां करने से सनम कैसा शर्माए। की घटाएं होश उड़ाती अदाएं जुल्फों च बेखौफ अदा ख्वाब बनकर सताए। कोई साहिर महबूब है हमारा या बंद आंखों में भी वो रूप नजर आए। कदमों से तेरे राहों में आती बहार, छुपते  ही तेरे वो घना कोहरा छाए। এনব্সভ্ নু ; # गुलशन बहार चफ़ा की यह गुत्थी मुझको उलझाए। बेरहम  इश्क की होती ना कभी शाम जितना भुलाया तू उतना मुझे भाए। - ShareChat