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#꧁☆જય દ્વારકાધીશ☆꧂
꧁☆જય દ્વારકાધીશ☆꧂ - जिस आत्मा को माया 95= रज dololl 21.. आज वही माया के दरबार में भीख मांग रही है | माया सिर पर ताज पहनकर बैठी है॰. जाम की कमार्र और आत्मा মিমংন उसके पीछे पीछे भजन आत्मा चल रही हैं | सतसम पूरा जीवन धन, रिश्ते और नाम कमाने में निकल जाता है. लेकिन अंत समय साथ सिर्फ कर्म ओर नाम की कमाई जाती है | संत कहते हैं अब भी समय हैं॰ মনম্ভুম্ত মী शब्द ही आत्मा का 66 असली सहारा हैं ।   गुरूमुख बनने का। रूहानी विचार जिस आत्मा को माया 95= रज dololl 21.. आज वही माया के दरबार में भीख मांग रही है | माया सिर पर ताज पहनकर बैठी है॰. जाम की कमार्र और आत्मा মিমংন उसके पीछे पीछे भजन आत्मा चल रही हैं | सतसम पूरा जीवन धन, रिश्ते और नाम कमाने में निकल जाता है. लेकिन अंत समय साथ सिर्फ कर्म ओर नाम की कमाई जाती है | संत कहते हैं अब भी समय हैं॰ মনম্ভুম্ত মী शब्द ही आत्मा का 66 असली सहारा हैं ।   गुरूमुख बनने का। रूहानी विचार - ShareChat