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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - घायल दिल की सजा লিব না িলন ক सज़ा है, ना बिछड़ने की ये सज़ा है। ये दर्द तो सिर्फ प्यार निभाने की, बेपनाह कातिल सज़ा है। तेरी यादों का बोझ दिल पर, #81 हर धड़कन में छुपी पास भी नहीं, दूर भी नहीं , यूँ कैसी मो हब्बत क्री अदाहै  हर ख़्वाब तेरे नाम कर दिए, फिर भी तक़दीर ने रुला दिया। 34/ हैं हर रोज़ मुझसे, पूछते क्या यही इश्क़ निभाने की सज़ा है? दिल ने कहा बस तेरा ही रहूँगा, ने कहा ये सज़ा है। दुनिया जीते जी मरने की आदत सी है, নপনাম 81 शायद यही प्यार की लिखित प्रकाश पंडित घायल दिल की सजा লিব না িলন ক सज़ा है, ना बिछड़ने की ये सज़ा है। ये दर्द तो सिर्फ प्यार निभाने की, बेपनाह कातिल सज़ा है। तेरी यादों का बोझ दिल पर, #81 हर धड़कन में छुपी पास भी नहीं, दूर भी नहीं , यूँ कैसी मो हब्बत क्री अदाहै  हर ख़्वाब तेरे नाम कर दिए, फिर भी तक़दीर ने रुला दिया। 34/ हैं हर रोज़ मुझसे, पूछते क्या यही इश्क़ निभाने की सज़ा है? दिल ने कहा बस तेरा ही रहूँगा, ने कहा ये सज़ा है। दुनिया जीते जी मरने की आदत सी है, নপনাম 81 शायद यही प्यार की लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat