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#📿एकादशी🪔🙏 *Varuthini Ekadashi ki हार्दिक शुभकामनाएँ*
📿एकादशी🪔🙏 - वरूथिनी एकादशी १३ अप्रैल २०२६ (सोमवार ) महात्म्यः " सौभाग्य और पापों के नाश के लिए सर्वोपरि मानी गई है। " वरूथिनी एकादशी पूजन विधि २०२६: सटीक मुहूर्त विष्णु  विशेष विथानः भगवान কী পুনা  एकादशी तिथि प्रारंभः के "वराह अवतार  १३ अप्रेल २०२६, रात्रि संकल्पः १३ अप्रैल सुवह १ १६ वजे स्नान के वाद पीले वस्त्र धारण  কোনহীী নিথি মসাদ: करें जल लेकर संकल्प ले 14 সসল 2026, যানি  पूजनः प्रतिमा को गंगाजल  1.08 ಫ31 पंचामृत स्नान कराए। पीला  सूर्योदय  ওনমা নিথি: "ঘুঁকি चंदन, पीले पुष्प, ऋत फल के समय एकादशी हे, तत (खरबूजा ) अर्पित करे  13 3Myr 2026 (TIdR) दलः भोग में तुलसी  को ही रखा जाएगा। " तुलसी  पत्ता रखें। (नोटः एकादशी पारण (वत खोलने और रविवार को च IST तुलसी  বসিনি ৪, হানিবায কী নীৎ)  काो) समय8 दीपकः शाम को मंदिर ओर पारण तिथिः १४ अप्रेल के पास घी का दीपक तुलसी २०२६ (मंगलवार ) जलाए शुभ समयः सुबह 0६:५४  वर्जित आहारः चावल, बजे से ०८३३१ बजे के बीच. मसूर दाल चना कोदो, शहद  सिद्घमंत्र (৪হি বামা মুন৪ 06:54 বডী वर्जित। फलाहार (फल, दूध समाप्त हो रहा है॰ इसलिए  मूल मंत्रः ३० नमो भगवते वासुदेवाय।।  मेवे) का ही उपयोग करे। पारण इस समय के वाद करें) विष्णु गायत्री मंत्रः ३० नारायणाय विद्महे | विष्णु " प्रचोदयात्। वासुदेवाय धीमहि तन्नो विशेष संयोग tathastuindia  सोमवार को एकादशी होने से ' हरि हर' योग वनता है। भगवान নিষ্]  और शिव की पूजा से मानसिक शांति और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है। वरूथिनी एकादशी १३ अप्रैल २०२६ (सोमवार ) महात्म्यः " सौभाग्य और पापों के नाश के लिए सर्वोपरि मानी गई है। " वरूथिनी एकादशी पूजन विधि २०२६: सटीक मुहूर्त विष्णु  विशेष विथानः भगवान কী পুনা  एकादशी तिथि प्रारंभः के "वराह अवतार  १३ अप्रेल २०२६, रात्रि संकल्पः १३ अप्रैल सुवह १ १६ वजे स्नान के वाद पीले वस्त्र धारण  কোনহীী নিথি মসাদ: करें जल लेकर संकल्प ले 14 সসল 2026, যানি  पूजनः प्रतिमा को गंगाजल  1.08 ಫ31 पंचामृत स्नान कराए। पीला  सूर्योदय  ওনমা নিথি: "ঘুঁকি चंदन, पीले पुष्प, ऋत फल के समय एकादशी हे, तत (खरबूजा ) अर्पित करे  13 3Myr 2026 (TIdR) दलः भोग में तुलसी  को ही रखा जाएगा। " तुलसी  पत्ता रखें। (नोटः एकादशी पारण (वत खोलने और रविवार को च IST तुलसी  বসিনি ৪, হানিবায কী নীৎ)  काो) समय8 दीपकः शाम को मंदिर ओर पारण तिथिः १४ अप्रेल के पास घी का दीपक तुलसी २०२६ (मंगलवार ) जलाए शुभ समयः सुबह 0६:५४  वर्जित आहारः चावल, बजे से ०८३३१ बजे के बीच. मसूर दाल चना कोदो, शहद  सिद्घमंत्र (৪হি বামা মুন৪ 06:54 বডী वर्जित। फलाहार (फल, दूध समाप्त हो रहा है॰ इसलिए  मूल मंत्रः ३० नमो भगवते वासुदेवाय।।  मेवे) का ही उपयोग करे। पारण इस समय के वाद करें) विष्णु गायत्री मंत्रः ३० नारायणाय विद्महे | विष्णु " प्रचोदयात्। वासुदेवाय धीमहि तन्नो विशेष संयोग tathastuindia  सोमवार को एकादशी होने से ' हरि हर' योग वनता है। भगवान নিষ্]  और शिव की पूजा से मानसिक शांति और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है। - ShareChat