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#shayrana ishq
shayrana ishq - मैं नहीं चाहती अब कोई मेरे हिस्से आए, आँसू मेरी आँखों से बहते पोंछे मेरे पीड़ित मन को कंधा दे। मैं तो अब केवल इतना चाहती हूँ, स्वयं को इतना समर्थ बना लूँ॰ कि अपनी पीड़ाओं और ज़ख्मों के घाव स्वयं भर सकूँ मैं नहीं चाहती अब कोई मेरे हिस्से आए, आँसू मेरी आँखों से बहते पोंछे मेरे पीड़ित मन को कंधा दे। मैं तो अब केवल इतना चाहती हूँ, स्वयं को इतना समर्थ बना लूँ॰ कि अपनी पीड़ाओं और ज़ख्मों के घाव स्वयं भर सकूँ - ShareChat