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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ससुराल वाले भले ही घटिया मिले है मुझे but मायके वाले इतना प्यार और saport करते है की कभी मेहसूस ही नही होने दिया की बेटी शादी के बाद पराई हो जाती है " और इसी बात से पर साप लोटता है की ससुराल वालो के कलेजे मेरे माँ बाप ने मुझे कभी परया नही समझा दोगलो तुम लोग मेरे माँ - बाप के पैर के धूल के बराबर भी नही हो समझे ससुराल वाले भले ही घटिया मिले है मुझे but मायके वाले इतना प्यार और saport करते है की कभी मेहसूस ही नही होने दिया की बेटी शादी के बाद पराई हो जाती है " और इसी बात से पर साप लोटता है की ससुराल वालो के कलेजे मेरे माँ बाप ने मुझे कभी परया नही समझा दोगलो तुम लोग मेरे माँ - बाप के पैर के धूल के बराबर भी नही हो समझे - ShareChat