ShareChat
click to see wallet page
search
#📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #शब्द संवाद
📓 हिंदी साहित्य - यह कैसी कशिश है झील सी आँखों में। हर वक्त ही उलझ जाता हूँ सलाख़ी में। उमंगों में हर रोज ही मैं उड़ान भरता हू, पर कटा मैं पंछी , कहाँ दम हैपीरखीं  0 Pae यह कैसी कशिश है झील सी आँखों में। हर वक्त ही उलझ जाता हूँ सलाख़ी में। उमंगों में हर रोज ही मैं उड़ान भरता हू, पर कटा मैं पंछी , कहाँ दम हैपीरखीं  0 Pae - ShareChat