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#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - अब किसी को खोने से डर नहीं लगता, क्योंकि खोते खोते खुद को पा लिया है। पहले लोग जरूरी लगते थे, अब सुकून जरूरी लगने लगा है। बातें कम हो गई हैं मेरी, पर समझ बहुत बढ़ गई है, अब हर किसी को अपना कहना, मुझे सही नहीं लगता ! वो "गाली" भी मुझे दे , तो में सुन कर "जब्त " करता हूं! मेरे " दुश्मन" समझते हैं , मुझे " गुस्सा " नहीं आता. ! मेरेघरके "बड़े" , अक्सर मुझे ये "दर्स" देते हैं. ! की "कुत्ता" काट भी ले,, तो उसे "काटा" नहीं जाता. ! अब किसी को खोने से डर नहीं लगता, क्योंकि खोते खोते खुद को पा लिया है। पहले लोग जरूरी लगते थे, अब सुकून जरूरी लगने लगा है। बातें कम हो गई हैं मेरी, पर समझ बहुत बढ़ गई है, अब हर किसी को अपना कहना, मुझे सही नहीं लगता ! वो "गाली" भी मुझे दे , तो में सुन कर "जब्त " करता हूं! मेरे " दुश्मन" समझते हैं , मुझे " गुस्सा " नहीं आता. ! मेरेघरके "बड़े" , अक्सर मुझे ये "दर्स" देते हैं. ! की "कुत्ता" काट भी ले,, तो उसे "काटा" नहीं जाता. ! - ShareChat