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#📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍️ साहित्य एवं शायरी #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य
📚कविता-कहानी संग्रह - विपत्तियां चाहे प्राण ही क्यों न हर लें, परंतु निज धर्म और पौरुष के मार्ग से रंच मात्र भी विचलित होना कदापि स्वीकार्य नहीं । " ٤٩ विपत्तियां चाहे प्राण ही क्यों न हर लें, परंतु निज धर्म और पौरुष के मार्ग से रंच मात्र भी विचलित होना कदापि स्वीकार्य नहीं । " ٤٩ - ShareChat