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#शब्द संवाद
शब्द संवाद - अल्लाह मग़फ़रत की मग़नफ़रत फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला  ভকভ্ঞনা ক্রই | औँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा, बशीर बद्र साहब मुशाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा  கி बेवक़्त जाऊँगा , सब चौक पड़ेंगे अगर इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा  जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र  ऑँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा  ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुमने मेरा काँटों ्भरा बिस्तर नहीं देखा  मुझे कहता हे मेरा चाहने वाला  पत्थर में मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा  खत ऐसा लिखा हे कि नगीने से जड़े है॰ जीकाआनडतकाल वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा अल्लाह मग़फ़रत की मग़नफ़रत फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला  ভকভ্ঞনা ক্রই | औँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा, बशीर बद्र साहब मुशाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा  கி बेवक़्त जाऊँगा , सब चौक पड़ेंगे अगर इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा  जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र  ऑँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा  ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुमने मेरा काँटों ्भरा बिस्तर नहीं देखा  मुझे कहता हे मेरा चाहने वाला  पत्थर में मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा  खत ऐसा लिखा हे कि नगीने से जड़े है॰ जीकाआनडतकाल वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा - ShareChat