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🌼 योगिनी एकादशी 2026: कथा, महत्व एवं शुभ मुहूर्त 🌼
योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। पद्म पुराण के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है और भक्त को सुख, समृद्धि तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🕉️ योगिनी एकादशी 2026 – शुभ समय
📅 योगिनी एकादशी: शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
⏰ एकादशी तिथि प्रारम्भ: 10 जुलाई 2026, प्रातः 08:16 बजे
⏰ एकादशी तिथि समाप्त: 11 जुलाई 2026, प्रातः 05:22 बजे
🌿 पारण समय: 11 जुलाई 2026, 01:50 PM – 04:36 PM
🕉️ हरि वासर समाप्त: 11 जुलाई 2026, 10:32 AM
🌼 गौण योगिनी एकादशी
📅 शनिवार, 11 जुलाई 2026
🌿 पारण समय: 12 जुलाई 2026, 05:32 AM – 08:18 AM
☀️ विशेष नोट: पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी, इसलिए शास्त्रानुसार गौण एकादशी का पारण इस समय किया जाएगा।
📖 योगिनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन समय में कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी राजधानी अलकापुरी में हेममाली नाम का एक यक्ष पुष्प लाने का कार्य करता था। प्रतिदिन वह मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए प्रस्तुत करता था।
एक दिन हेममाली अपनी सुंदर पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर पुष्प नहीं पहुँचा सका। भगवान शिव की पूजा में विलंब होने पर कुबेर अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने हेममाली को शाप दिया कि वह कुष्ठ रोग से पीड़ित होकर पृथ्वी पर कष्टमय जीवन बिताए।
शाप के कारण हेममाली अत्यंत दुःखी होकर वन-वन भटकने लगा। एक दिन उसकी भेंट महान ऋषि मार्कण्डेय से हुई। हेममाली ने अपनी व्यथा सुनाई। ऋषि ने उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करने का उपदेश दिया।
हेममाली ने पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया, वह शापमुक्त हुआ और पुनः सम्मानपूर्वक अपने दिव्य स्वरूप तथा परिवार को प्राप्त कर सका।
🌺 योगिनी एकादशी का महत्व
भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है।
रोग, दुःख और कष्ट दूर होते हैं।
मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस व्रत का फल हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान बताया गया है।
🌿 व्रत के मुख्य नियम
प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
सात्त्विक जीवन अपनाएँ तथा क्रोध, असत्य और निंदा से दूर रहें।
यथाशक्ति दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता करें।
द्वादशी के दिन निर्धारित पारण समय में व्रत का पारण करें।
🙏 संदेश
"योगिनी एकादशी हमें यह शिक्षा देती है कि सच्चा पश्चाताप, श्रद्धा और भगवान श्रीहरि की भक्ति से सबसे बड़ा पाप भी नष्ट हो सकता है। जो व्यक्ति निष्ठापूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है।"
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