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मां तेरी बहुत याद आती है!
आंख मेरी भर आती है,
ऐ मां जब भी तेरी याद आती है,
क्या तू सचमुच मुझको भूल गई,
मां बेटे के रिश्ते की कड़ी टूट गई,
एक शहर में रहकर भी तुझसे मिले,
मुझे महीनों महीनों बीत जाते हैं !
तुझे देखने को मैं तरस जाता हूं,
चाह कर भी तुझे मिल नहीं पाता हूं,
आखिर ऐसा क्या हो गया?
तेरे मेरे बीच में,समझ नहीं आता,
सभी भाई बहन तुझे लड़ते थे,
तुझसे झगड़ते थे, तुझे दुतकारते थे!
कभी-कभी गुस्से में वह तुझे,
अपशब्द तक कह जाते थे,
लेकिन तू सब कुछ भूल कर,
उन्हें अपने गले लगा लेती थी,
अपनी ममता का बास्ता देकर,
उनकी हर बात भुला देती थी,
लेकिन मैं तो तुझे कभी कुछ नहीं कहा,
फिर भी तूने मुझे दुत्कार दिया !
जितना उनको प्यार किया,
उतना तूने कभी भी मुझे प्यार नहीं किया !
एक मां होकर तूने क्यों इतना भेदभाव किया,
तेरे लिए तो सभी बच्चे एक बराबर थे,
तूने तो सभी को पैदा करने में,
एक बराबर दर्द रहा था?
फिर किसी से कम किसी से ज्यादा,
तेरा प्यार क्यों रहा, जबकि,
हम सब तेरे जिगर के टुकड़े थे !
जो माँ बाप अपने घर में,
अपने बच्चों के साथ सियासत करते हैं,
नेताओं की तरह अपने ही घर में,
फूट डालकर राज करते हैं,
सच कह रहा हूं, मां ऐसे घर कभी भी,
फलते -- फूलते और पनपते नहीं हैं !
और यकीं मानों माँ इस गलती का,
पूरे पूरे घर सहित सब परिणाम भुगतते है,
लाख समझाओं वेद पुराणों का उदाहरण देकर,
फिर भी तो यह मां-बाप नहीं समझते हैं,
इतिहास गवाह है माता-पिता की गलती का,
परिणाम उनके बच्चे जीवन भर भुगतते है,
कर्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम राम कि, तरह,
जीवन भर सुख कि तलाश भटकते है !
मां बाप मां बाप की तरह अपना फर्ज नहीं निभाते हैं,
इसीलिए जीवन भर खुद भी सुख चैन नहीं पाते है,
मां-बाप यदि पुण्य कर्मों के बल पर मिलते हैं,
तो बच्चे भी कर्मों के हिसाब से जन्म लेते हैं,
इस हाथ दें,और इस हाथ दें,
हाथ से हाथ कर्मों का हिसाब होता है?
बजह चाहे जो भी हो,
लेकिन अंत में माँ मैं यही कहता हूं,
तुझे क्या पता तेरे बिना मैं कैसे रहता हूं,
अक्सर आंख मेरी भर आती है,
जब याद तेरी आती है !
अनिल "अमन" #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


