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#भगवत गीता #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः| गहीत्वैतानि संयाति वायर्गन्धानिवाशयात। वाय गन्धकेस्थान सेगन्धकोजैसे ग्रहण करकेले जाता है वैसेही देहादिका स्वामी जीवात्मा भीजिस शरीर का त्याग उससे इन मन सहित इन्द्रियोंको ग्रहण करके फिर कसता जिसशरीरको प्राप्त होता है उसमेंजाता है II8|| व्याख्याः जैसे वायु गंध को ग्रहण करके उसे एक स्थान से द्रूसरे स्थान् परलेजाती हि चैसेही आत्मा भीशरीरको छोडने पर उन् मन और इन्द्रियों को अपने साथले जाती है। जब आत्मा एक शरीरसे दूसरे शरीरमें जाती हैतोवह उस नये शरीर में पुनः प्रवेश करती हैl इस श्लोक में श्री कृष्ण नेजीवन और मृत्यु के चक्र को . समझाया है। यह दर्शाया गया है कि जैसे वाय गंध को ले जाती है वैसेही आत्मा शरीर को छोड़नेके बॉद नई देह ग्रहण करती है। यह प्रक्रिया पुनर्जन्म की ओर इशारा करती है जिहाँ आत्मा परानी देह को छोड़कर नई देह में प्रवेश करतीहै। यह श्लोक हमे यह सिखाता है किजीवनकी अस्थिरता और मृत्य के बाद आत्मा का स्थानांतरण एक निरंतर प्रक्रिया है और यह हमें जिन्म और मृत्यु के रहस्यो को समझने मे मदद करता है। शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः| गहीत्वैतानि संयाति वायर्गन्धानिवाशयात। वाय गन्धकेस्थान सेगन्धकोजैसे ग्रहण करकेले जाता है वैसेही देहादिका स्वामी जीवात्मा भीजिस शरीर का त्याग उससे इन मन सहित इन्द्रियोंको ग्रहण करके फिर कसता जिसशरीरको प्राप्त होता है उसमेंजाता है II8|| व्याख्याः जैसे वायु गंध को ग्रहण करके उसे एक स्थान से द्रूसरे स्थान् परलेजाती हि चैसेही आत्मा भीशरीरको छोडने पर उन् मन और इन्द्रियों को अपने साथले जाती है। जब आत्मा एक शरीरसे दूसरे शरीरमें जाती हैतोवह उस नये शरीर में पुनः प्रवेश करती हैl इस श्लोक में श्री कृष्ण नेजीवन और मृत्यु के चक्र को . समझाया है। यह दर्शाया गया है कि जैसे वाय गंध को ले जाती है वैसेही आत्मा शरीर को छोड़नेके बॉद नई देह ग्रहण करती है। यह प्रक्रिया पुनर्जन्म की ओर इशारा करती है जिहाँ आत्मा परानी देह को छोड़कर नई देह में प्रवेश करतीहै। यह श्लोक हमे यह सिखाता है किजीवनकी अस्थिरता और मृत्य के बाद आत्मा का स्थानांतरण एक निरंतर प्रक्रिया है और यह हमें जिन्म और मृत्यु के रहस्यो को समझने मे मदद करता है। - ShareChat