Pratahkallive
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काम निकलते ही ‘पवित्र’ कांवड़ बनी कचरा? यात्रा के बाद दूषित हो रही मां गंगा... कल तक जिस कांवड़ को कंधे पर उठाकर पूरे सम्मान के साथ लाया जा रहा था, आज वही कांवड़ गंगा मैया के आंचल में लावारिस कचरा बनकर तैर रही है! जिस 'पवित्र' जल को भरते वक्त माथा टेका गया, यात्रा पूरी होते ही उसी धाम और नदी को दूषित करने में एक पल भी नहीं सोचा गया। यह नजारा सिर्फ कचरे का नहीं, बल्कि हमारी खोखली होती जा रही नागरिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। क्या हमारी आस्था सिर्फ अपनी मनोकामना पूरी होने तक ही सीमित है? अगर हम जिस नदी को 'मां' कहते हैं, उसी को मैला करने से परहेज नहीं करते, तो सवाल उठना लाजिमी है—क्या यह सच्ची भक्ति है या महज सहूलियत का ढोंग? अब समय आ गया है कि हम अपनी आस्था के साथ-साथ पर्यावरण और नदियों के प्रति अपने कर्तव्य को भी समझें। आस्था का असली मतलब प्रकृति का सम्मान करना है, उसे दूषित करना नहीं!#KanwarYatra #SaveGanga #CleanGanga #GangaNadi #SanatanDharma CivicSense #📹शॉर्ट अपडेट्स वीडियो 🎥 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP
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