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#जय श्री कृष्ण "श्रीमन्नन्दनिकेतनाङ्गण मधि स्थित्वा यशोदाऽऽत्मजं। नेत्रोन्मीलनरोदनाय यतते दृष्ट्वा सखीमाह्वयत्।। शीघ्रं दोलिकमञ्चमानय यतः सुप्तो हि शान्तो भवेत्। मातृस्नेहसुलालितो विजयते श्रीलाडिलेशो विभुः।।" श्रीनंदरायजी के भवन के आंगन में विराजमान श्रीयशोदाजी... जब अपने पुत्र को आँखें मलते हुए ओर रुदन करने को उद्यत देखतीं हैं... तब अपनी सहचरी को बुलाकर शीघ्र ही पलना ले आने का आदेश देतीं हैं... ताकि उसमें पौढ़कर अपना लाल शांत हो जाये...!!! माता के उत्कट स्नेह से इस प्रकार सुलालित... श्रीलाडिलेश प्रभु का सदा विजय हो। .
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