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#महाराणा सांगा “अस्सी घाव लगे थे तन पे। फिर भी व्यथा नहीं थी मन में ।।” — महाराणा सांगा (12 अप्रैल 1482 – 30 जनवरी 1528) शौर्य, पराक्रम एवं अद्वितीय वीरता के प्रतीक, “महाराणा संग्राम सिंह 'राणा सांगा' जी” की 544वीं जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन ! उनका अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण भारतीय इतिहास में अमर है। उनका जीवन हमें स्वाभिमान, वीरता और राष्ट्ररक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। आइए, उनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम भी समाज और राष्ट्र की सेवा में अपना योगदान दें। #महाराणा सांगा जी की जयंती #महाराणा सांगा की जयंती पर नमन💐💐💐 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌍भारतीय इतिहास📚
महाराणा सांगा - 12 319@2026 @Harih Jahirer १२ Apr. ঘান ল্মী থ নন ঐ, अस्सी फिर भी व्यथा नहीं थी मन में। अपने साहस एवं शक्ति से मेवाड़ साम्राज्य योद्धा , विस्तार करने वाले महापराक्रमी কা अजेयता के साक्षात रूप वीर शिरोम्रणि महाराणा सांगा जी ( संग्राम सिंह ) की जन्म जयंती पर उन्हें मेरा कोटिशः नमन। १२ अप्रैल १४८२ - ३० जनवरी १५२८ /harish jahirey 12 319@2026 @Harih Jahirer १२ Apr. ঘান ল্মী থ নন ঐ, अस्सी फिर भी व्यथा नहीं थी मन में। अपने साहस एवं शक्ति से मेवाड़ साम्राज्य योद्धा , विस्तार करने वाले महापराक्रमी কা अजेयता के साक्षात रूप वीर शिरोम्रणि महाराणा सांगा जी ( संग्राम सिंह ) की जन्म जयंती पर उन्हें मेरा कोटिशः नमन। १२ अप्रैल १४८२ - ३० जनवरी १५२८ /harish jahirey - ShareChat