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Betiyan Bojh Nahin Amanat Hoti Hai #❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - अगर दामाद मिले , अच्छा ना तो बेटी को वापस लाना कमज़ोरी नहीं, एक पिता की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है.. क्योंकि बाहर खड़ा लेकिन जिंदा समाज बेटी का दर्द कब्र का हाल नहीं समझता.. पूछता है, बेटियाँ बोझ नहीं , अमानत होती हैं... अगर दामाद मिले , अच्छा ना तो बेटी को वापस लाना कमज़ोरी नहीं, एक पिता की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है.. क्योंकि बाहर खड़ा लेकिन जिंदा समाज बेटी का दर्द कब्र का हाल नहीं समझता.. पूछता है, बेटियाँ बोझ नहीं , अमानत होती हैं... - ShareChat