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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। वो जो कल तक अपने से लगते थे हमें , ही दूर आज उनसे जाना पडता है। रात भर यादों का साया चलता है नींद को भी अब समझाना पड़ता है। मिले हमें , हमने चाहा था सच्चा प्यार पर हर बार दिल को बहलाना पडता है। वक़्त की इस बेरहम दुनिया में देखो, खुद को हर रोज़ आज़माना पड़ता है। दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। नीचे लीजीतन प्रकाश पंडित दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। वो जो कल तक अपने से लगते थे हमें , ही दूर आज उनसे जाना पडता है। रात भर यादों का साया चलता है नींद को भी अब समझाना पड़ता है। मिले हमें , हमने चाहा था सच्चा प्यार पर हर बार दिल को बहलाना पडता है। वक़्त की इस बेरहम दुनिया में देखो, खुद को हर रोज़ आज़माना पड़ता है। दिल के ज़ख्मों को अब छुपाना पड़ता है, हर मुस्कान के पीछे मुस्कुराना पड़ता है। नीचे लीजीतन प्रकाश पंडित - ShareChat