My Bite
"हमसाया"
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कुछ यूँ जुगनुओं ने अँधेरो में,
खुदको ही रौशन कराया है!
जैसे फिर से बुझते चिरागों ने ही,
बढ़कर हर रास्ता दिखलाया है!
खुद से ही होकर के गुमसुदा,
जैसे दिल को भी बहलाया है!
फिर भी ऐसा क्यों लगता है,
जैसे पीछे-पीछे कोई हमसाया है!
भीतर के ही घुँघरुओं ने हरबार,
बजकर जज्बात गुनगुनाया है!
दिल के आँधी और झोंकों ने,
ग़ज़ल लिखना भी सिखाया है!
साँसों में भी कुछ बसते हैं,
बड़े फुर्सत से जिन्हें बनाया है!
नज़र तलबगार हैं जिनके,
उन्होंने नूर को कुछ यूँ बढ़ाया है!
मुरौवत है अपनो की जो,
दरबदर हरबार ही आजमाया है!
क्या खूब है दूर का तो अपना,
और पास-पास का ही पराया है!
हँसी-ठिठोली भी जान ले लें,
बहुत सोंच के दिल मे बसाया है!
कारीगरी है उल्फत है अदाओं कि,
जो दिल में कोई भितरतक समाया है!
दुनिया समझे जो भी समझना है,
आखिर किसने कितना निभाया है!
उसके इस दीवानगी ने और.....
मेरे पागलपन ने ही मुझे यूँ शायर बनाया है!💕💞
..........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️