जिस दिन लड़की वही शर्तें रख दे जो समाज उससे रखता है, उसी दिन पाखंड बेनकाब हो जाता है।
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#HindiWriterRishika #स्त्री_सम्मान #दोहरे_मापदंड #समाज_का_सच #नारी_समानता ShareChat: @HindiWriterRishika #☝ मेरे विचार
![☝ मेरे विचार - फ़र्ज़ः जो लड़की निभाती है, लड़का नहीं एक तरफ़ा लड़की की ज़िम्मेदारियों लडक की ज़िम्मदारिया (समाज की नज़र में) घर छोडाूकर ससुराल जाना घर सभालना (बस कमाना ) परिवार और रिश्तेदारा को नानभाना ।पिता क अधिकार R< (ನ दहज़ का चोझ सहना अपनी मर्ज़ी से जीना पति की हर बात गानना दहज़ लेना उसका हक ससुराल के काम करना नही ಣ4 ಹl ಣ/H1 সদ] 4l Vrfsr ' बच्चों की ज़िम्मेदारी नोकरी करे तो घरभी रंभाले नीकरी चे चाद आराम करना अपनी इच्छाओं का त्याग शौक पूरे करना उसका गलती हा तो गाफ़ी आसान हर ताना चुपचाप सहना इज्ज़त ओर गान- राम्गान समाज की इज़्ज़त का चोझ उठाना समाज त्याग सिर्फ़ उसका , अधिकार सिर्फ़ उसका क्यों नही? सोच बदलो , समाज बदलेगा | फ़र्ज़ः जो लड़की निभाती है, लड़का नहीं एक तरफ़ा लड़की की ज़िम्मेदारियों लडक की ज़िम्मदारिया (समाज की नज़र में) घर छोडाूकर ससुराल जाना घर सभालना (बस कमाना ) परिवार और रिश्तेदारा को नानभाना ।पिता क अधिकार R< (ನ दहज़ का चोझ सहना अपनी मर्ज़ी से जीना पति की हर बात गानना दहज़ लेना उसका हक ससुराल के काम करना नही ಣ4 ಹl ಣ/H1 সদ] 4l Vrfsr ' बच्चों की ज़िम्मेदारी नोकरी करे तो घरभी रंभाले नीकरी चे चाद आराम करना अपनी इच्छाओं का त्याग शौक पूरे करना उसका गलती हा तो गाफ़ी आसान हर ताना चुपचाप सहना इज्ज़त ओर गान- राम्गान समाज की इज़्ज़त का चोझ उठाना समाज त्याग सिर्फ़ उसका , अधिकार सिर्फ़ उसका क्यों नही? सोच बदलो , समाज बदलेगा | - ShareChat ☝ मेरे विचार - फ़र्ज़ः जो लड़की निभाती है, लड़का नहीं एक तरफ़ा लड़की की ज़िम्मेदारियों लडक की ज़िम्मदारिया (समाज की नज़र में) घर छोडाूकर ससुराल जाना घर सभालना (बस कमाना ) परिवार और रिश्तेदारा को नानभाना ।पिता क अधिकार R< (ನ दहज़ का चोझ सहना अपनी मर्ज़ी से जीना पति की हर बात गानना दहज़ लेना उसका हक ससुराल के काम करना नही ಣ4 ಹl ಣ/H1 সদ] 4l Vrfsr ' बच्चों की ज़िम्मेदारी नोकरी करे तो घरभी रंभाले नीकरी चे चाद आराम करना अपनी इच्छाओं का त्याग शौक पूरे करना उसका गलती हा तो गाफ़ी आसान हर ताना चुपचाप सहना इज्ज़त ओर गान- राम्गान समाज की इज़्ज़त का चोझ उठाना समाज त्याग सिर्फ़ उसका , अधिकार सिर्फ़ उसका क्यों नही? सोच बदलो , समाज बदलेगा | फ़र्ज़ः जो लड़की निभाती है, लड़का नहीं एक तरफ़ा लड़की की ज़िम्मेदारियों लडक की ज़िम्मदारिया (समाज की नज़र में) घर छोडाूकर ससुराल जाना घर सभालना (बस कमाना ) परिवार और रिश्तेदारा को नानभाना ।पिता क अधिकार R< (ನ दहज़ का चोझ सहना अपनी मर्ज़ी से जीना पति की हर बात गानना दहज़ लेना उसका हक ससुराल के काम करना नही ಣ4 ಹl ಣ/H1 সদ] 4l Vrfsr ' बच्चों की ज़िम्मेदारी नोकरी करे तो घरभी रंभाले नीकरी चे चाद आराम करना अपनी इच्छाओं का त्याग शौक पूरे करना उसका गलती हा तो गाफ़ी आसान हर ताना चुपचाप सहना इज्ज़त ओर गान- राम्गान समाज की इज़्ज़त का चोझ उठाना समाज त्याग सिर्फ़ उसका , अधिकार सिर्फ़ उसका क्यों नही? सोच बदलो , समाज बदलेगा | - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_146208_185776e7_1777266140774_sc.jpg?tenant=sc&referrer=pwa-sharechat-service&f=774_sc.jpg)

